किसने तोड़ा अर्जुन का घमंड – Divya Himachal: No. 1 in Himachal news – News – Hindi news – Himachal news – latest Himachal news..

कहते हैं कि जब भी इस दुनिया में किसी को अहंकार हो जाए, तो उसका अहंकार अवश्य टूटता है। भगवान तो भाव के भूखे होते हैं। वह किसी एक के नहीं सारी दुनिया के पालनहार हैं। ऐसी कई कथाएं और कहानियां सुनने में आती हैं। जिनमें स्पष्ट शब्दों में लिखा होता है कि घमंड करने वाले का कभी कोई सत्कार नहीं करता। अहंकार मनुष्य को सफलता नहीं, बल्कि असफलता की राह पर ले जाता है। महाभारत द्वेष, ईर्ष्या, अहंकार, अपमान और बदले की आग में सब कुछ भस्म कर देने वाला, साथ ही दर्द और दुख के समुद्र की कथा है , तो मान-सम्मान, स्वाभिमान और जीवन को जीने की कला देने वाला एक अद्भुत कथानक भी है।
हस्तिनापुर और इंद्रप्रस्थ के महापुरुषों को राजकुल में पले-बढ़े होने की वजह से अहंकार होना तो लाजिमी था। किसी को बल का तो किसी को श्रेष्ठ युद्धवीर होने का, किसी को रूप का, तो किसी को छल में महारत का घमंड था। यानी अहंकार हर किसी के दिल के किसी कोने में जरूर था। इसी तरह अर्जुन के बारे मे कहा जाता है कि उसको अपने श्रेष्ठ धर्नुधर होने का गर्व था, लेकिन हर कोई इस बात से अनजान है कि उसको एक और बात का घमंड था और वह घमंड उसके सर चढ़कर भी बोलता था। वह अपने आप को श्रीकृष्ण का सबसे बड़ा भक्त मानता था। अर्जुन समझता था कि उससे बड़ा कोई दूसरा भक्त नहीं हो सकता।
एक बार अर्जुन को इसी बात को लेकर अहंकार हो गया कि वही भगवान का सबसे बड़ा भक्त है। उसकी इसी भावना को श्रीकृष्ण ने समझ लिया। एक दिन वह अर्जुन को अपने साथ घूमाने ले गए। रास्ते में उनकी मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण से हुई। उसका व्यवहार थोड़ा विचित्र था। वह सूखी घास खा रहा था और उसकी कमर से तलवार लटक रही थी। अर्जुन ने उससे पूछा, आप तो अहिंसा के पुजारी हैं।
जीव हिंसा के भय से सूखी घास खाकर अपना गुजारा करते हैं, लेकिन फिर हिंसा का यह उपकरण तलवार क्यों आपके साथ है। ब्राह्मण ने जवाब दिया, मैं कुछ लोगों को दंडित करना चाहता हूं। अर्जुन ने पूछा, आपके शत्रु कौन हैं? ब्राह्मण ने कहा, मैं चार लोगों को खोज रहा हूं ताकि उनसे अपना हिसाब चुकता कर सकूं। सबसे पहले तो मुझे नारद की तलाश है। नारद मेरे प्रभु को आराम नहीं करने देते, भजन-कीर्तन कर उन्हें जगाए रखते हैं।
फिर मैं द्रौपदी पर भी क्रोधित हूं। उसने मेरे प्रभु को ठीक उसी समय पुकारा, जब वह भोजन करने बैठे थे। पांडवों को दुर्वासा ऋषि के श्राप से बचाने उन्हें तुरंत जाना पड़ा। उसने मेरे भगवान को जूठा खाना खिलाया। ब्राह्मण ने कहा कि मेरा तीसरा शत्रु है हृदयहीन प्रह्लाद। उसने मेरे प्रभु को गर्म तेल के कड़ाहे में प्रविष्ट कराया, हाथी के पैरों तले कुचलवाया और अंत में खंभे से प्रकट होने के लिए विवश किया और चौथा शत्रु है अर्जुन।
उसकी दुष्टता देखिए। उसने मेरे भगवान को अपना सारथी बना डाला। उसे भगवान की असुविधा का तनिक भी ध्यान नहीं रहा। कितना कष्ट हुआ होगा मेरे प्रभु को। यह कहते ही ब्राह्मण की आंखों में आंसू आ गए। यह देख अर्जुन का घमंड चूर-चूर हो गया। उसने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगते हुए कहा, मान गए प्रभु, इस संसार में न जाने आपके कितने तरह के भक्त हैं। मैं तो कुछ भी नहीं हूं। इस बात से एक शिक्षा तो यह मिलती है कि कभी भी किसी को अपने से कम नहीं समझना चहिए। क्या पता जिंदगी में कब और कहां कोई आपके काम आ सकता है।
अपने सपनों के जीवनसंगी को ढूँढिये भारत  मैट्रिमोनी पर – निःशुल्क  रजिस्ट्रेशन!
. किसने तोड़ा अर्जुन का घमंड appeared first on Divya Himachal: No. 1 in Himachal news – News – Hindi news – Himachal news – latest Himachal news….

( साभार  :-  संवाददाता   /   एजेन्सी   /   अन्य न्यूज़ पोर्टल  )

ताजा खबरों के हिन्दी में अपडेट लगातार पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें, आप हमे ट्विटर पर भी फालो कर सकते है |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

x

Check Also

साधना की ओर – Divya Himachal: No. 1 in Himachal news – News – Hindi news – Himachal news – latest Himachal news..

...