स्ट्रॉक के लक्षण – Divya Himachal: No. 1 in Himachal news – News – Hindi news – Himachal news – latest Himachal news..

स्ट्रॉक या ब्रेन स्ट्रॉक हमें तब होता है, जब हमारे मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त प्रवाह कम हो जाता है या फिर हमारे मस्तिष्क के किनारे में रक्त प्रवाह में लीकेज हेमरेज होता है…

युवाओं में स्ट्रॉक के बढ़ते मामलों का मुख्य कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, रक्त शर्करा, उच्च कोलेस्ट्रॉल, शराब, धूम्रपान और मादक पदार्थों की लत के अलावा आरामतलब जीवन शैली, मोटापा, जंक फूड का सेवन और तनाव है। युवा रोगियों में यह अधिक घातक साबित होता है, क्योंकि यह उन्हें जीवन भर के लिए विकलांग बना सकता है। आरामतलब जीवन शैली, मोटापा, जंक फूड का सेवन और तनाव के कारण भी युवाओं में ब्रेन स्ट्रॉक के मामलों में वृद्धि हो रही है। इसका इलाज नहीं कराने पर दिमागी कोशिकाओं और आवाज को नुकसान हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप मरीज जीवन भर के लिए विकलांग बन सकता है। फोर्टिस अस्पताल (नोएडा) में न्यूरोसर्जरी विभाग के अतिरिक्त निर्देशक एवं वरिष्ठ न्यूरो एवं स्पाइन सर्जन डा. राहुल गुप्ता के अनुसार कुछ समय पहले तक युवाओं में स्ट्रॉक के मामले सुनने में नहीं आते थे, लेकिन अब युवाओं में भी ब्रेन स्ट्रॉक अपवाद नहीं है।
ब्रेन स्ट्रॉक आने का कारण
ब्रेन स्ट्रॉक  किसी हार्ट अटैक की ही तरह है। स्ट्रॉक या ब्रेन स्ट्रॉक हमें तब होता है, जब हमारे मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त प्रवाह कम हो जाता है या फिर हमारे मस्तिष्क के किनारे में रक्त प्रवाह में लीकेज हेमरेज होता है। ब्रेन हमारे शरीर का सीपीयू है और ब्रेन स्ट्रॉक की वजह से मस्तिष्क के किसी हिस्से पर पड़ने वाले असर के मुताबिक यह शरीर को प्रभावित कर सकता है। इसका सबसे गहरा असर हमारे शरीर में लकवा होने पर नजर आता है, लेकिन इसका असर हमारे चलने, बोलने की क्षमता का कम होना, हमारे चेहरे के हिस्से में बदलाव होना आदि में भी देखा जा सकता है। इसके होने से व्यक्ति बिस्तर को पकड़ लेता है या फिर उसकी मृत्यु भी हो जाती है।
हर साल इतने लोगों की मौत
वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डा. ज्योति बाला ने कहा, देश में हर साल ब्रेन स्ट्रॉक के लगभग 15 लाख नए मामले दर्ज किए जाते हैं। स्ट्रॉक भारत में समय से पहले मृत्यु और विकलांगता का एक महत्त्वपूर्ण कारण बनता जा रहा है। दुनिया भर में हर साल स्ट्रॉक से 2 करोड़ लोग पीडि़त होते हैं, जिनमें से 50 लाख लोगों की मौत हो जाती है और अन्य 50 लाख लोग अपाहिज हो जाते हैं। (एनसीबीआई) के अनुसार कोरोनरी धमनी रोग के बाद स्ट्रॉक मौत का सबसे आम कारण है। इसके अलावा यह क्रॉनिक एडल्ट डिसएबिलिटी का एक आम कारण है। 55 वर्ष की आयु के बाद 5 में से एक महिला को और 6 में से एक पुरुष को स्ट्रॉक का खतरा रहता है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार हमारे देश में हर तीन सेकंड में किसी न किसी व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रॉक होता है और हर तीन मिनट में ब्रेन स्ट्रॉक के कारण किसी न किसी व्यक्ति की मौत होती है। मस्तिष्क के ऊतकों में ऑक्सीजन और पोषक तत्त्वों की कमी होने पर कुछ ही मिनटों में मस्तिष्क की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं, जिसके कारण मृत्यु या स्थायी विकलांगता हो सकती है। डा. ज्योति ने कहा इलाज में देरी होने पर लाखों न्यूरॉन्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और मस्तिष्क के अधिकतर कार्य प्रभावित होते हैं। इसलिए रोगी को समय पर चिकित्सा सहायता प्रदान करना महत्त्वपूर्ण है। शरीर के संकेतो को समझते हुए स्ट्रॉक को खुद से दूर रखने के लिए रक्तचाप को नियंत्रण रखिए।
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( साभार  :-  संवाददाता   /   एजेन्सी   /   अन्य न्यूज़ पोर्टल  )

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