बलिया: अब यों ही बदलता रहेगा मौसम का मिजाज, डा० गणेश पाठक

बलिया ब्यूरो एक खास बात चीत में पर्यावरणविद डा० गणेश पाठक ने मौसम में अचानक हो रहे बदलाव के बारे मे उनका कहना है कि मौसम का मिजाज यों ही अचानक बदलता रहेगा। मौसम में होने वाला यह बदलाव यद्यपि कि प्राकृतिक रूप से भी होता है , किन्तु वर्तमान समय में मौसम में जो अचानक बदलाव आ रहा है और इसका परिणाम इतना घातक हो रहा है कि यह प्राकृतिक आपदा का रूप ग्रहण कर धन- जन की अपार क्षति कर दे रहा है ।
प्रश्न यह उठता है कि आजकल मौसम में अचानक परिवर्तन क्यों हो रहा है। इस संदर्भ में तो यही कहा जा सकता है कि यह मानव की गतिविधियों की ही देन है। मानव ने अपनी भोगवादी प्रवृत्ति एवं विलासिता पूर्ण जीवन जीने के लिए पर्यावरण का इस कदर दोहन एवं शोषण किया है कि प्रर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो गया है और ओजोन परत का क्षरण, ग्रीन हाउस प्रभाव , वन विनाश आदि के चलते वायुमंडल एवं धरातलीय तापमान में निरंतर वृद्धि होती जा रही जिसके चलते मौसम एवं जलवायु में भी तेजी से परिवर्तन होने लगा है।
यदि आज कल हो रहे मौसम के परिवर्तन को देखा जाय तो इसमें पूर्वी वायु एवं पश्चिमी विक्षोभ दोनों का हाथ है। विगत कई दिनों से पूर्वी हवा प्रवाहित हो रही है, जो समुद्री भाग की तरफ से आने के कारण नमी युक्त है। दूसरी तरफ इसी दौरान पश्चिमी विक्षोभ के चलते पछुवा हवा भी प्रवाहित होने लगी है । चूंकि इस समय पछुवा हवा शुष्क होती है, किन्तु पूर्वी हवा के नमी युक्त होने के कारण पछुवा हवा भी नमीयुक्त होकर अचानक वर्षा की स्थिति उत्पन्न कर देती है और तेज आंधी एवं तुफान के साथ वर्षि भी हो जाती है ।
उपर्युक्त दशाएं स्थानीय सयंत्र पर ही विशेष रूप से उत्पन्न होती हैं । इस समय पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में निम्न वायुदाब का क्षेत्र स्थापित हो जाता है और हवा का यह गुण होता है कि वह उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब क्षेत्र की तरफ प्रवाहित हो थी हैं। ऐसी स्थिति में पूरे उत्तर भारत में स्थानीय स्तर पर जगह जगह चक्रवात की स्थिति उत्पन्न होती रहती है जो आंधी तुफान के रूप में भयंकर रूप धारण कर वर्षा और ओला भी प्रदान करती है जिससे धन जन की भी हानि होती है।
आज और कल के मौसम के सम्बन्ध में यह कहा जा सकता है कि आज जैसा कि देखने में आ रहा है पूर्वी हवा का प्रवाह धीरे धीरे कम हो रहा है ‌ । इस स्थिति में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना बढ़ जायेगी और यदि ऐसा हुआ तो निश्चित ही चक्रवात उत्पन्न होगा और आंधी तुफान के साथ वर्षा भी होगी, जैसा कि मौसम विभाग भी चेतावनी दे चुका है।
इस समय एक विशेष मौसमी दशा भी उत्पन्न होती है , जिसे “काल बैसाखी” कहा जाता है । चूंकि यह बैसाख का महिना है और इस समय बंगाल की खाड़ी से जो चक्रवाती तुफान उत्पन्न होता है, वह अत्यन्त भयंकर होता है ।उसमें उत्पन्न होने वाले बादल काले काले भयंकर रूप धारण कर तेज तुफान के साथ भयंकर तबाही मचाता है, जिसमें अपार धन जन की क्षति होती है, इसी लिए इसे “काल बैसाखी” अर्थात बैसाख महीने का काल कहा जाता है । बलिया सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी इस काल बैसाखी का प्रभाव देखने को मिलता है । इसी आधार पर उत्तर भारत में भी ऐसे तुफानों को ” काल बैसाखी” कहा जाता है ‌ । विगत तीन चार दिनों से मौसम की जो प्रवृतियां दिखाई दे रही हैं उनको देखते हुए यह आकलन लगाया जा सकता है कि आज या कल तक बलिया सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी काल बैसाखी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जो भयंकर भी हो सकती है। अंत: मौसम के दुष्प्रभाव से बचने हेतु विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है एवं मौसम विभाग द्वारा दी गरीब चेतावनी एवं प्रशासन द्वारा दी गयी चेतावनी तथा उपायों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ।
हां एक बात अवश्य है कि ऐसे आपदा के आने पर घबडा़ना नहीं चाहिए बल्कि बचाव का रास्ता अपनाना चाहिए और जहां तक सम्भव हो आंधी तूफान के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए एवं वाहन भी नहीं चलाना चाहिए।

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