सिने पर्यटन समझने में चूक – Divya Himachal: No. 1 in Himachal news – News – Hindi news – Himachal news – latest Himachal news..

फिर सिने पर्यटन की ओर मुड़ते हिमाचली सरोकार वन एवं परिवहन मंत्री की राय से प्रकट हुए और चर्चा की झलक सरकार की मंत्रिमंडलीय मंत्रणा तक पहुंची। पर्यटन के इस पहलू को तसदीक करते हिमाचल की बाहें हमेशा खुली रही हैं, लेकिन चंद फिल्म को-आर्डिनेटरों की वजह से ही अब तक का कारवां दिखाई दिया। लगभग सभी तरह का सिनेमा अपने फिल्मांकन को हिमाचल से जोड़ता रहा है, तो अब इसे व्यवस्थित शक्ल देने की आवश्यकता है। फिल्म शूटिंग के जरिए हिमाचल का अपना पर्यटन ब्रांड मजबूत होता है, तो इस माध्यम से रोजगार के अनेक अवसर आतिथ्य सेवाओं से लेकर स्थानीय कलाकारों के प्रदर्शन तक जुड़ते हैं। कमोबेश हर सरकार सिने पर्यटन के बिंदु तक पहुंचती रही है, लेकिन इसे स्पष्टता से रेखांकित ही नहीं किया गया। सिने पर्यटन महज फिल्म शूटिंग की अनुमति न होकर, एक पूरी व्यवस्था का कारगर होना है। यानी केवल फिल्म निर्माताओं को बुलाने से ही बाधाएं दूर नहीं होंगी, बल्कि आवश्यक उपकरणों से सुसज्जित स्टूडियो व शूटिंग स्थल पर सुविधाओं का स्थायी प्रबंध भी करना होगा। अभी तक यही मालूम नहीं कि फिल्म शूटिंग सिर्फ प्रशासनिक अनुमति के दायरे में आता है या कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय है। प्रदेश के कला एवं संस्कृति तथा पर्यटन विभाग के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों की पृष्ठभूमि पर, हिमाचल बेहतरीन फिल्म शूटिंग की विविधता समेटे हुए है। विडंबना यह है कि मौजूदा बजटीय प्रावधानों में भी इस दिशा में कोई योजना दिखाई नहीं देती। पर्यटन राज्य बनने की कसौटी पर अमल हो, तो यह आत्मनिर्भरता का सबब भी होगा। फिल्म उद्योग से भी कहीं अधिक अवसर टीवी सीरियल के माध्यम से उपलब्ध हैं और जहां सिने पर्यटन सीधे रोजगार से जुड़ता है। ऐसे में अगर बजट ने रोजगार केंद्रित होकर कुछ सुविधाएं दी हैं या निवेश का मार्गदर्शन किया है, तो फिल्म-टीवी की संभावनाओं पर खामोशी नहीं टूटी। यह कई तरह से संभव है। पहले स्तर पर हिमाचली कलाकार, फिल्मकार तथा फिल्म टीवी क्षेत्र में रुचि-दक्षता रखने वाले प्रोफेशनल को स्थानीय परिप्रेक्ष्य में समझना होगा। हर साल हिमाचली प्रतिभा भी अपने संघर्ष की बदौलत फिल्म-टीवी के विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार तलाश कर रही है, तो इस प्रकार के प्रशिक्षण के लिए एक राज्य स्तरीय संस्थान आवश्यक हो जाता है। दूसरे, फिल्म-टीवी सीरियल की पृष्ठभूमि में हिमाचल उचित स्थान बनता जा रहा है तो आवश्यक सुविधाओं व अधोसंरचना की दिशा में स्पष्टता के साथ निर्णायक होना पड़ेगा। तीसरे, इसी परिप्रेक्ष्य में हिमाचली पृष्ठभूमि में बनने वाली फिल्मों, हिमाचली भाषा में फिल्म निर्माण तथा हिमाचली कलाकारों के लिए अनुदान-प्रोत्साहन योजनाएं बनानी होंगी। चौथे, हिमाचल में मनोरंजन को बाकायदा उद्योग का रुतबा देकर मल्टीप्लेक्स, मनोरंजन पार्क व इसी तरह के अन्य निवेश क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर कर छूट तथा विशेष सहायता प्रदान करनी होगी, ताकि आने वाले पर्यटक ऐसी सुविधाओं को अपने ठहराव का जरिया बनाएं। सिने पर्यटन के प्रादेशिक और बाह्य पक्ष दोनों ही मजबूत करने होंगे, ताकि सरकार द्वारा अनछुए क्षेत्रों में जहां ढांचागत सुविधाएं मुहैया हों, वहीं धरोहर विरासत को भी पनपने की जगह मिले। इसके लिए एक व्यापक परियोजना व नीति-नियमों की जरूरत है। कनेक्टिविटी के वर्तमान संदर्भों को मजबूत करते हुए हिमाचल से सीधे मुंबई, गोवा, जयपुर तथा बंगलूर की उड़ान तभी शुरू होगी, यदि कम से कम कोई एक बड़ा हवाई अड्डा इस लायक बन जाए। कांगड़ा हवाई अड्डे का सैन्य विस्तार इस दिशा में एक बड़ी संभावना है, लेकिन इसके साथ-साथ कुछ अन्य हवाई पट्टियां मंडी, चंबा या बिलासपुर में स्थापित करनी होंगी। फिल्म व टीवी शूटिंग के लिहाज से कुछ आवश्यक स्टूडियो पीपी मोड के तहत बनाए जा सकते हैं, जबकि गरली-परागपुर में प्राचीन व धरोहर हवेलियों की उपस्थिति से एक सामुदायिक फिल्म सिटी की रूपरेखा बनाई जा सकती है। जिस तरह स्पीति के डेमूल गांव के सभी घरों की औरतों ने मिलकर सामुदायिक होम स्टे की एक नई अवधारणा पैदा कर दी, उसी तरह गरली-परागपुर की धरोहर संपत्तियों के मालिकों को जोड़कर सामुदायिक फिल्म सिटी का संचालन पर्यटन व कला, भाषा तथा संस्कृति विभाग मिलकर करें। इससे सिने पर्यटन के साथ-साथ ग्रामीण पर्यटन भी विकसित होगा। स्थानीय जनता के सहयोग के साथ एक राज्य स्तरीय फिल्म एवं टीवी शिक्षण संस्थान की स्थापना के साथ-साथ आवश्यक स्टूडियो तथा सभागार का विकास, लोक कलाकारों के लिए संपर्क सेतु साबित होगा।
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( साभार  :-  एजेन्सी / संवाददाता  / अन्य न्यूज़ पोर्टल  )

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